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लागत वक्र || Cost Curve in Hindi

उत्पादन की प्रक्रिया में प्रयुक्त होनेवाली अनेक लागत इकाइयों के विनियोजन मूल्य को लागत की संज्ञा दी जाती है। क्योंकि किसी वस्तु का उत्पादन करने के लिए उत्पादक का बाह्य साधना पर कुछ खर्च करना पड़ता है; जैसे उत्पादन के साधनों का पुरस्कार, कच्चे माल की खरीद, भारवाहन व्यय इत्यादि।

इसके अतिरिक्त उत्पादक अपने साधनों तथा स्वयं के श्रम को भी उत्पादन प्रक्रिया में लगाता है। उत्पादक द्वारा किये गये बाह्य व्यय तथा आन्तरिक व्यय के योग को ही उत्पादन लागत (Production Cost) कहा जाता है।

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डॉ० हण्टर किण्ट के अनुसार, “उत्पादन लागत में वे सभी भुगतान शामिल हैं जो कि दूसरों को उनकी सेवा के बदले में दिये जाते हैं। इसमें मूल्य ह्रास और अप्रचलन-जैसी बातें भी सहायता करती हैं।”

लागत की इस अवधारणा को सर्वप्रथम श्रीमती जॉन रॉबिन्सन ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘Theory of Imperfect Competition’ में ज्यामिति विधि द्वारा प्रस्तुत किया था। लागत वक्रों के इस ज्यामितीय स्वरूप का निम्नलिखित परिप्रेक्ष्यों में प्रस्तुत किया जा सकता है।

(i) स्थिर लागत तथा परिवर्तनशील लागत (Fixed Cost and Variable Cost)

(ii) कुल लागत, औसत लागत एवं सीमान्त लागत (Total Cost, Average Cost and Marginal Cost)

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