Economics Of Growth And Development

हैरड व डोमर मॉडल || The Harrod and Domar Models

हैरड व डोमर मॉडल (The Harrod and Domar Growth Models):

ब्रिटिश अर्थशास्त्री प्रो. जॉन मेनार्ड एम कीन्स (John Maynard Keynes) का रोजगार सिद्धान्त आय निर्धारण की अल्पकालीन व्याख्या प्रस्तुत करता है। इंग्लैण्ड के प्रो. हेनरी रॉय फोर्ब्स हैरड (Henry Roy Forbes Harrod) तथा अमेरिका के प्रो. एवसी डोमर (Evsey Domar) ने बाद में दीर्घकालीन वृद्धि (Long term Growth) से सम्बन्धित व्याख्याएं प्रस्तुत की। दोनों मॉडलों के निष्कर्षों की समानता के कारण इसे हैरड व डोमर मॉडल कहा जाता है।

प्रो. हैरड (Prof. RF Harrod) एवं डोमर (Evsey Domar) ने विकसित देशों के संदर्भ में आर्थिक विकास के मॉडल प्रस्तुत किये हैं जिनका उद्देश्य पूंजीवादी विकसित अर्थव्यवस्था के लिए ऐसी आवश्यक वृद्धि दर को खोजना रहा है जिससे अर्थव्यवस्था को निर्विघ्न रूप से पूर्ण रोजगार स्तर पर बनाए रखा जा सके।

सतत वृद्धि की आवश्यक दशाएं (Conditions of Steady Growth):

हैरड एवं डोमर ने आर्थिक विकास में विनियोग पर बल देते हुए उसकी दोहरी भूमिका प्रतिपादित की है। प्रथम, विनियोग से आय का सृजन होता है एवं दूसरे, इससे पूंजी स्टॉक में वृद्धि होकर अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता बढ़ती है। आय का सृजन, विनियोग का मांग प्रभाव है तथा उत्पादन क्षमता वृद्धि, विनियोग का पूर्ति प्रभाव है। शुद्ध विनियोग में वृद्धि होने पर वास्तविक आय तथा उत्पादन दोनों में वृद्धि होती है।

अब प्रश्न यह है कि आय का पूर्ण रोजगार संतुलन कैसे बनाये जा सकता है? हैरड-डोमर (Harrod And Domar) इसका उत्तर देते हुए कहते हैं कि उक्त सन्तुलन के लिए यह आवश्यक है कि वास्तविक आय एवं उत्पादन में उसी दर में वृद्धि होनी चाहिए जिस दर से पूंजी स्टॉक की उत्पादन क्षमता बढ़ रही है। आय-वृद्धि की इस आवश्यक दर को अभीष्ट संवृद्धि दर (Warranted Rate of Growth) अथवा पूर्ण क्षमता विकास दर (Full Capacity Growth Rate) कहते हैं।

हैरोड-डोमर मॉडल की मान्यताएं (Assumptions of Harrod and Domar Model):

हैरोड-डोमर का विकास मॉडल निम्न मान्यताओं पर आधारित है :

  1. अर्थव्यवस्था में आय का पूर्ण रोजगार स्तर विद्यमान है।
  2. इसमें ‘बन्द अर्थव्यवस्था’ की मान्यता स्वीकार की गयी है जिसमें सरकारी हस्तक्षेप नहीं होता।
  3. विनियोग और उत्पादन क्षमता के निर्माण में कोई समय विलम्ब (Time lag) नहीं है अर्थात् विनियोग के फलस्वरूप उत्पादन क्षमता का त्वरित निर्माण होता है।
  4. सीमांत बचत प्रवृत्ति (MPS) स्थिर रहती है तथा MPS एवं औसत बचत प्रवृत्ति (APS) समान होती हैं।
  5. बचत और विनियोग का सम्बन्ध उसी वर्ष की आय से रहता है।
  6. आय का पूंजी स्टॉक का अनुपात अर्थात् पूंजी गुणांक (Capital Co-efficient) स्थिर रहता है।
  7. सामान्य कीमत स्तर स्थिर रहता है अर्थात् मौद्रिक आय तथा वास्तविक आय समान रहती है।
  8. उत्पादन में पूंजी तथा श्रम का अनुपात स्थिर रहता है।
  9. ब्याज की दर में कोई परिवर्तन नहीं होता।

यह भी पढ़ें: हैरड का वृद्धि मॉडल (Harrod’s Growth Model):

डोमर का वृद्धि मॉडल (Domar’s Growth Model):

Keyphrases: Harrod and Domar models in hindi, The harrod and domar model, harrod domar model, Harrod and domer model, harrod and domer, हैरड एवं डोमर मॉडल, हैरड एवं डोमर के मॉडल, हैरड-डोमर मॉडल, हैरड-डोमर के मॉडल, हैरॉड एवं डोमर के मॉडल, हैरॉड डोमर मॉडल, हैरॉड व डोमर मॉडल

नीतिश कुमार मिश्र
नीतिश कुमार मिश्र (Neetish Kumar Mishra) इस वेबसाइट के फाउंडर हैं। वे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से स्नातक एवं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से परास्नातक (अर्थशास्त्र) कर चुके हैं। अब वे इस वेबसाइट के माध्यम छात्रों को बेहतर कंटेंट देकर उनको आगे बढ़ाने की ओर प्रयासरत हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *