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अमर्त्य सेन: अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार जीतने वाले पहले एशियाई

अर्थशास्त्री एवं नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन (Amartya Sen) का जन्म 03 नवम्बर 1933 को बंगाल के मानिकगंज (वर्तमान बांग्लादेश मे) में हुआ था। वे साल 1988 में अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार जीतने वाले पहले एशियाई व्यक्ति बने थे। इसके अलावा उन्हें उन्हें साल 1999 में भारत के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ और साल 2017 में राजनीतिक विज्ञान के क्षेत्र में ‘जोहान स्किट’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

अमर्त्य सेन का शुरुआती जीवन:

अमर्त्य सेन को यह नाम गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर ने दिया था। उनका परिवार वारी और मानिकगंज, ढांका का रहने वाला था जो वर्तमान में बांग्लादेश में पड़ता है। उनके पिता आशुतोष सेन ढांका यूनिवर्सिटी में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर थे। वो 1945 में सपरिवार बंगाल आ गये थे। यहां आकर वो पश्चिम बंगाल सेवा आयोग ( बाद में अध्यक्ष पद भी संभाला) और यूपीएससी में कई अहम पदों पर भी रहे। अमर्त्य सेन की माता अमिता सेन; क्षिति मोहन सेन की पुत्री थीं, जो प्राचीन इतिहास के विद्वान थे और रवींद्र नाथ टैगोर के एसोसिएट थे। वो दिल्ली विश्वविद्यालय में कुछ वर्षों तक कुलपति का पद भी संभाल चुके हैं।
अमर्त्य सेन ने ढांका के सेंट जॉर्जी स्कूल से हाइस्कूल, उसके बाद पथ भावना स्कूल (रवींद्र नाथ द्वारा बनाया गया), 1951 में अर्थशास्त्र और गणित से कलकत्ता प्रेसीडेंसी कॉलेज (कलकत्ता यूनिवर्सिटी) से ग्रेजुएट हुए। जहां उन्हें ओरल कैंसर हो गया और उनकी जिंदगी बचने की मात्र 15 % उम्मीद बची थी। रेडियोएक्टिव उपचार के बाद वो 1953 में ट्रिनिटी कॉलेज कैम्ब्रिज से दुबारा ग्रेजुएट अर्थशास्त्र (ऑनर्स) की पढ़ाई की, मास्टर्स और रिसर्च (1955-56) भी वहीं से किया। उसके बाद वो नवस्थापित जाधवपुर यूनिवर्सिटी कलकत्ता (उस समय शीर्ष 5 विश्वविद्यालयों में से एक था) में अर्थशास्त्र विभाग के सबसे युवा हेड ऑफ डिपार्टमेंट बने। उसके बाद उन्हें ट्रिनिटी कॉलेज से फेलोशिप का न्योता मिला।

अमर्त्य सेन का अर्थशास्त्र में योगदान :

अमर्त्य सेन का अर्थशास्त्र की दुनिया मे योगदान अतुलनीय है। अमर्त्य सेन के आर्थिक विचार इस प्रकार हैं – कल्याणकारी अर्थशास्त्र, कल्याण के सूचक, गरीबी सूचकांक अथवा सूचक अंक, भारत मे उदारीकरण, अकाल का विश्लेषण, व्यक्तिगत मूल्य सामूहिक निर्णय। अमर्त्य सेन महान अर्थशास्त्री हिक्स और एरो के बाद सामान्य संतुलन के क्षेत्र में एक मात्र सबसे महत्वपूर्ण विचारक हैं।
नोबल दृष्टांत के अनुसार विकास सामाजिक चयन सिद्धान्त में सेन का योगदान, विकास अर्थशास्त्र में सेन का कार्य (मुख्य रूप से गरीबी और अकाल के बीच संबंध में), सेन का अधिकार और सामर्थ्य की अवधारणाएं महत्वपूर्ण है। सेन प्रथम एशियाई और प्रथम भारतीय हैं जिन्हें अर्थशास्त्र का नोबल मिला था।
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